जब इस संबंध में जागरूक नागरिक द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारी रोहित पंवार से फोन पर बात की गई, पहले उन्होंने इस विषय पर जानकारी होने से ही इनकार कर दिया उसके बाद बड़ी बेरुखी से जवाब दिया गया एन. एच ए. आई अंतर्गत आने आने वाले इस नेशनल हाईवे पर यदि रोड़ों के साइड में मालवा फेंका जा रहा है तो इसमें मैं आपको क्या परेशानी है और यह किस प्रकार से गैरकानूनी है, साक्ष्य के रूप में फोटो और वीडियो भेजने पर अधिकारी का तर्क था कि "यह मलबा सर्विस लेन बनाने के लिए इकट्ठा किया गया है।" अधिकारी के द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गए इस जवाब से यह सवाल उठता है क्या नेशनल हाईवे के मानकों के अनुसार, पुराने मलबे (C&D Waste) से सर्विस लेन तैयार की जा सकती है? हाईवे की मुख्य सड़क से भी ज्यादा ऊंचाई तक मलबा जमा करना तकनीकी रूप से किस इंजीनियरिंग का हिस्सा है? यह ढलान और बारिश के समय हाईवे पर फिसलन का कारण बन सकता है।यदि यह आधिकारिक निर्माण सामग्री है, तो इसका भंडारण सुरक्षा मानकों के अनुसार क्यों नहीं किया गया? कुछ समय पूर्व यहाँ आम जनता के बैठने के लिए बेंच लगाई गई थीं, अब इन बेंचो पर आम आदमी का बैठना इस मलवे के कारण दुर्भर हो जाएगा और यहां पर काफी बड़ा आबादी क्षेत्र है इस मलवे से उड़ने वाली धूल आने वाले दिनों में इन रिहाइशी क्षेत्र के निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनेगी,जनता की सुविधाओं को नष्ट करने का अधिकार विभाग को किसने दिया? क्या सर्विस लेन बनाने के नाम पर शहर का कूड़ा हाईवे किनारे जमा किया जा सकता है?
गौरतलब है कि इसी स्थान पर पहले भी मलबे की डंपिंग रोकने के लिए शिकायत की गई थी, जिसके बाद विभाग ने भारी कंक्रीट के अवरोधक (Obstacles) लगाए थे ताकि डंपर वहां न पहुंच सकें। अब उन्हीं अवरोधकों के बीच में या उनके ऊपर मलबा फेंकना यह दर्शाता है कि विभाग के कुछ जिम्मेदारों के बीच तालमेल की कमी है या निर्माण कार्य में लगे रसूखदार ठेकेदारों का दबाव । हर्रावावाला की यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या मलबे से सड़क बनाने का कोई नया नियम आया है, या फिर यह केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का एक तरीका है। आखिर भारी भरकम टोल चुकाने के बाद भी आम आदमी को उसके टोल के मुताबिक सुविधा कब मिलेगी कब अधिकारी राष्ट निर्माण में कर अदा करने वाले आम आदमी से अपना गैर जिम्मेदारना व्यवहार बंद करेंगे।





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