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| सब इंस्पेक्टर हरजीत सिंह का हाथ निहंग सिखों ने काट दिया, जिनका पटियाला में हीरो जैसा स्वागत किया गया था । |
देहरादून। उत्तराखंड लंबे समय से अपनी शांतिप्रिय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पर्यटन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में राज्य में बाहरी राज्यों से जुड़े आपराधिक मामलों, पर्यटक क्षेत्रों में बढ़ती हिंसक घटनाओं तथा हथियारों के खुले प्रदर्शन ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा निहंग विवाद ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक कानून के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। हाल के घटना कर्मो में उत्तराखंड में निहगों से जुड़े विवाद ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, ऐसा नहीं है की निहंगों से जुड़ा यह विवाद सिर्फ उत्तराखण्ड राज्य में ही हुआ है , इससे पहले भी पंजाब और अन्य राज्यों में निहंगों से संबन्धित कई हिंसक मामले सामने आ चुके है । इनमे से कुछ घटनाएं मुख्य रूप से न्यूज चैनल और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्ख़ियो में रही है , अप्रैल 2020 पटियाला पंजाब में लॉकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा पूछताछ किये जाने पर निहगों द्वारा पुलिस दल पर हमला कर दिया जिसमे एक एसआई जो की सिख जाति से ही थे उनका का हाथ निहंगों द्वारा बड़ी ही क्रूरता से अपनी तलवार से उनका हाथ काट कर अलग कर दिया गया था । नवंबर 2023, सुल्तानपुर लोधी ( कपूरथला ) गुरद्वारा प्रबंधन विवाद के दौरान पुलिस और निहंगों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमे एक पुलिस कर्मी की मृत्यु हो गई थी, जुलाई 2024 लुधियाना में सिविल अस्पताल के बाहर निहंगों की वेशभूषा वाले चार लोगो द्वारा शिव सेना नेता द्वारा पर्यटकों द्वारा संदीप थापर पर तलवारो से हमला, जून 2026 गुरदासपुर वाहन क्रॉसिंग विवाद में दो पक्षों के बीच फायरिंग, जिसमें एक निहंग की मृत्यु और कई अन्य लोग घायल भी हुए थे। इसी प्रकार मई 2026 इसी प्रकार हिमाचल के कुल्लू जिले में पंजाब से आये पर्यटकों द्वारा एक लोकल व्यक्ति का हाथ और एक व्यक्ति का गाला काट कर घायल कर दिया था, इस के बाद ही हिमाचल डीजीपी ने सख्त कदम उठाते हुए राज्य में हथियारों की एन्ट्री को बैन करने के निर्देश जारी किये । हाल में ही उत्तराखण्ड के कर्णप्रयाग में लोकल दुकानदारों के साथ हुए मामूली कहा सुनी /विवाद में निहंगों द्वारा जिस प्रकार चार लोकल व्यक्तियों पर जान लेवा हमला किया गया एवं उसके बाद निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में निहंगों ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित नगरासू गुरुद्वारे के ऊपरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जो पंजाब के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत के बाद समाप्त हुआ, कर्णप्रयाग प्रकरण चार निहगों की गिरफ्तारी के विरोध में पंजाब से आये सेकड़ो निहगों जत्थो द्वारा कुल्हाल बार्डर( देहरादून ) पर पुलिस व आईटीबीपी द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए गए और अभी भी पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई है ,इन घटनाओ से यह तो स्पष्ट हो जाता है जब भी कोई व्यक्ति या संघटन कानून अपने हाथ में लेने का प्रयास करता है तो उससे सावर्जनिक सुरक्षा और सामजिक शांति दोनों प्रभावित होती है । भारतीय सविंधान का अनुच्छेद 25 सिख समुदाय को कृपाण धारण करने की धार्मिक स्वतंत्रा देता है, हालांकि यह अधिकार किसी भी व्यक्ति को हिंसा करने या कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं देता । यहाँ पर हमें ध्यान देना होगा निहंग विवाद ही केवल उत्तराखण्ड शासन प्रसाशन के लिए चिंता का विषय नहीं है। हाल के महीनों में कई गंभीर घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक चिंता पैदा की है। 2026 के जनवरी माह में हरिद्वार में पंतदीप पार्किंग में मात्र 100 रुपये की पार्किंग फीस को लेकर हरियाणा के युवको द्वारा अपनी एसयूवी कार से बड़ी बेहरमी पार्किंग मैनजर की कुचल कर हत्या कर दी गई । ऋषिकेश में 2026 जून माह में लोकल निवासियों द्वारा सावर्जनिक स्थान पर मदिरा पीने से रोकने पर बिहार के हिस्ट्रीशीटर अपराधियों द्वारा अवैध असले से फायरिंग कर दो स्थानीय निवासियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था इस प्रकार से मार्च 26 को सेना से सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जोशी की सुबह की सैर (मॉर्निंग वॉक) के दौरान अपराधियों के बीच हुई क्रॉस फायरिंग में जान चली गई। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने शहर के शांत और सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वारदात में शामिल अपराधी पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के रहने वाले हैं। दिसम्बर 25 में हुए एजेंल चकमा हत्या कांड में मुख्य आरोपी नेपाल फरार हो गया जिसे आज तक गिरफ्तार किया जा सका है, एंजेल चकमा हत्याकांड और ब्रिगेडियर मुकेश जोशी हत्याकांड जैसी घटनाओं ने राज्य की इस शांत छवि को गहरा आघात पहुँचाया है। इन घटनाओं से न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, बल्कि पर्यटकों और प्रवासियों के मन में असुरक्षा की भावना भी पैदा हुई है। इसके अलावा पर्यटन सीजन के दौरान हरिद्वार, देहरादून मसूरी, नैनीताल और , ऋषिकेश में राफ्टिंग क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के साथ मारपीट, शराब पीकर हुड़दंग, सड़क पर हिंसा तथा ट्रैफिक अव्यवस्था जैसी घटनाओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कानून के शासन का यदि सभी नागरिक समान कानून के अधीन रहेंगे, तभी सामाजिक सौहार्द, पर्यटन और उत्तराखंड की शांतिपूर्ण पहचान सुरक्षित रह सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड को कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। पर्यटन क्षेत्रों में पुलिस बल एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करना। सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई। बार-बार अपराध करने वाले बाहरी तत्वों की प्रभावी निगरानी तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई ,संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी, इंटेलिजेंस नेटवर्क और विशेष पुलिस गश्त का विस्तार करना होगा।
उत्तराखंड की पहचान शांति, पर्यटन और धार्मिक आस्था से जुड़ी रही है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय या राज्य से संबंधित हो यदि कानून अपने हाथ में लिया जाता है, हिंसा की जाती है या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाला जाता है, तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कानून के शासन का पालन। यदि सभी नागरिक समान कानून के अधीन रहेंगे, तभी सामाजिक सौहार्द, पर्यटन और उत्तराखंड की शांतिपूर्ण पहचान सुरक्षित रह सकेगी।



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