क्या उत्तराखण्ड की प्रस्तावित खेल नीति की रीढ़ बन सकता है , आईडीपीएल ?
ऋषिकेश हमेशा से ही पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र रहा है पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सरकारों द्वारा काफी कार्य किए गए हैं परंतु यहां के स्थानीय निवासियों के युवा होते बच्चों को हुए ध्यान में रखते हुए खेल के लिए ग्राउंड जीरो लेवल पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकि है।
आईडीपीएल 1980-90 के दशक में उत्तर प्रदेश राज्य के दौरान एंटीबायोटिक अपनी एंटीबायोटिक दवाइयां के लिए के लिए अलावा अपनी मूलभूत सुविधाओं के भी जाना जाता था, यहां के केंद्रीय विद्यालय और यहां के इण्टर कालेज व केंद्रीय विद्यालय की विज्ञानं संकाय की लैब जैसी सुविधा देहरादून के बोर्डिंग स्कूलों में भी मात देती थी , इस दौरान आईडीपीएल फैक्ट्री के परिसर से कई खिलाड़ियों ने जन्म लिया यहां पर साल भर राष्ट्रीय व राज्य स्तर, के खेल-कूद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ करता था , साल भर विभन्न खेलों के प्रतियोगिताओं लगातार आयोजन होने के कारण ऋषिकेश, आसपास के ग्रामीण क्षेत्र तथा वर्तमान में यमकेशर ,नरेन्द्रनगर, डोईवाला विधानसभा के बच्चे व युवाओं में भी खेल कूद प्रति हमेशा जागरूकता बनी रहती थी, खासकर आईडीपीएल की हॉकी व फुटबॉल की टीम का उन दिनों पूरे उत्तर भारत व उत्तर प्रदेश राज्य में डंका बचता था , आईडीपीएल परिक्षेत्र में खेल-कूद की मूलभूत सुविधा और खेल कूद के लिए अभ्यास करने हेतु लम्बे -चौड़े मैदान होने के कारण यहाँ से निकले कई खिलाड़ियों द्वारा ओ.एन.जी. सी. रेलवे , बीईजी रुड़की, सर्विसेज, उत्तर प्रदेश जैसे कई अन्य सस्थानों में बतौर खिलाड़ी के रूप में प्रतिनिधित्व किया, एवं कई खिलाड़ी अभी भी राज्य व राष्ट्रीय खेल संस्थानों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है , आज भी इस क्षेत्र के सैकड़ो युवा व बच्चे आईडीपीएल के खेल मैदानों का अपने स्तर पर सुधार करके फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, एथलीट आदि खेलो का अभ्यास करने आते है , परंतु मूलभूत सुविधाओं के अभाव और सरकार की उदासीनता के कारण आज इस क्षेत्र का युवा खेल के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहा है, और आईडीपीएल क्षेत्र खंडहर की स्थिति में हो चुका है 80 के दशक और 90 के दशक में यहाँ के सामुदायिक भवन जो हमेशा सांस्कृतिक आयोजन और इंडोर खेल से गुलजार रहते थे, आज वह नशेड़ियों के लिए मुफीद जगह बन चुके है।
आज उत्तराखण्ड सरकार आईडीपीएल क्षेत्र को जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित वैलनेस सेंटर से ध्यान हटाकर आईडीपीएल को नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट्स पटियाला व बेंगलुरु व पुणे की तर्ज पर विकसित करने की कोशिश करें तो इस क्षेत्र के कई युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने व रोजगार के अवसर मिल सकते हैं ऋषिकेश से लगते हुए ग्रामीण युवाओं के लिए भी खेल के क्षेत्र में विभिन्न अवसर प्रदान किये जा सकते है पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में युवा पीढ़ी में नशे के प्रति झुकाव काफी तेजी से बड़ा है, नशे के फैलते जहर और सोशल मिडिया के दुस्प्रभाव से लड़ने के लिए आईडीपीएल को खेल सस्थान के रूप में विकसित करके इस क्षेत्र के युवाओं की ऊर्जा को नई दिशा दी जा सकती है , पूर्वोत्तर राज्य में मणिपुर जैसा छोटा राज्य हमारे देश को कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दे चुका है उसका एकमात्र कारण है वहां स्पोर्ट्स के प्रति जनुन है, एक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर का खिलाडी सैकड़ो युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
उत्तराखंड व झारखंड का गठन लगभग एक ही समय में हुआ है लेकिन झारखंड राज्य खेल के क्षेत्र में में उत्तराखंड से कहीं आगे हैं , उत्तराखंड राज्य में कुछ एक खिलाड़ीयों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया गया है परंतु यह सिर्फ केवल उनकी अपनी प्रतिभा व लगन से सम्भव हुआ है, क्रिकेट के क्षेत्र में भी उत्तराखंड के खिलाड़ियों को बाहर जाकर ही अवसर प्रदान हुए हैं।
उत्तराखंड सरकार को अपनी खेल नीति में आईडीपीएल को नेशनल नेशनल स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट के तोर पर पुनर्जीवित किये जाने पर विचार किया जाना चाहिए, इससे पूरे गढ़वाल और और चमोली प्रांत से से लगते हुए कुमाऊं क्षेत्र को खेल को बढ़ावा देने में बहुत बड़ा सहयोग मिलेगा, यहाँ पर स्पोर्ट्स अथॉरिटीऑफ इंडिया द्वारा विभिन्न खेलो के शिविर आयोजित किये जा सकेंगे जिससे इस क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं को राज्य एवम राष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थानों में जाने का सीधा अवसर प्रदान होगा, स्थानीय युवाओं की विभिन्न खेलों के विषय में जानकारी हासिल होगी, जिससे वे इन खेलो में अपना करियर बना सकेंगे,स्थानीय स्तर पर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच तैयार होने से इसका सीधा लाभ उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा।
अतः यही उचित समय है जब उत्तराखंड सरकार की खेल नीति को परवान चढ़ाने हेतु आईडीपीएल को नेशनल स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित किया जाए।



0 Comments