देहरादून। जनपद के सहसपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने अभियुक्त देवेन्द्र (ग्राम लखपत नगर जिला बिजनौर) को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000/- रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है ।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 05 फरवरी 2019 को सहसपुर क्षेत्र से एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग पुत्री के लापता होने की तहरीर दी थी । आरोप था कि पड़ोस में रहने वाले देवेन्द्र सिंह ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर अगवा किया और उसे हरिद्वार व बिजनौर ले जाकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए । पुलिस ने विवेचना के बाद अभियुक्त के खिलाफ धारा 363, 366ए, 376 और पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था ।
इस महत्वपूर्ण मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुश्री अल्पना थापा ने दमदार पैरवी की। साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता और कंचन पैरोपकार ने पीड़िता को न्याय दिलाने हेतु कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय पैरवी की और निरंतर सहयोग प्रदान किया। अदालत के समक्ष पीड़िता समेत कुल 6 गवाह परीक्षित कराए गए । पीड़िता ने अपने बयानों में अभियुक्त द्वारा की गई दरिंदगी की पुष्टि की, जिसे मेडिकल रिपोर्ट और स्कूल के दस्तावेजों (TC और जन्म प्रमाण पत्र) ने भी पुख्ता किया, जिसमें पीड़िता की आयु घटना के समय 15 वर्ष से कम पाई गई ।
दोषी देवेन्द्र (निवासी बिजनौर, उत्तर प्रदेश) ने बचाव में तर्क दिया कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था, लेकिन अदालत ने पीड़िता के नाबालिग होने के आधार पर सहमति के तर्क को खारिज कर दिया । अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य है। न्यायाधीश अर्चना सागर ने दोषी को 10 साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया ।


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