देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलकारी आश्रितों की नियुक्ति का मामला एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है । साल 2011 से शुरू हुआ यह इंतजार 2024 में एक्ट बन जाने के बाद राज्य आंदोलनकारियों को एक उम्मीद की किरण दिखाई दी थी । कई अभ्यर्थियों की उम्र सरकारी सेवा के मानक पार कर रही है वे रोज इस आस में सचिवालय और शहीद स्मारक की तरफ टकटकी लगाए देखते है शायद आज उनके हक़ शासनदेश जारी हो जाए एक्ट बनने के 2 साल गुज़र जाने के बाद भी अपनी नियुक्तियां की राह देख रहे अभ्यर्थियों का उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के तत्वाधान में अपने हक़ को लेकर दसवें दिन भी धरना प्रदर्शन/ क्रमिक अनशन ,शहीद स्मारक देहरादून में जारी रहा।वर्ष 2011 से लंबित इस प्रकरण को लेकर आंदोलनकारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी आश्रितों की नियुक्ति संबंधी प्रकरण में ठप पड़ी नियुक्ति प्रक्रिया की मांग को लेकर जारी क्रमिक अनशन में आज नवीन नैथानी केंद्रीय महामंत्री चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखंड,दिनेश राणा बड़कोट उत्तरकाशी, सुनीता ठाकुर देहरादून, व रामकिशन विकास नगर बैठे । धरना स्थल पर आज गंभीर सिंह नेगी,दीवान सिंह कार्की ,विकास रावत, प्रभात डंडरियाल, सावित्री पवार,दीपा देवी,पंकज रावत, सचिन सेमवाल, सुरेश कुमार, बुद्धि रावत, मनोरथ ध्यानी ,शैलेश सेमवाल,जी आर रावत, धर्मानंद भट्ट, सुमित थापा, विनोद असवाल अध्यक्ष वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा ने समर्थन देते हुए राज्य सरकार से उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी आश्रितों को न्याय देते हुए नियुक्ति शीघ्र प्रदान करने की मांग की ।
संयुक्त मंच के संयोजक अंबुज शर्मा ने शासन - प्रशासन के ढुलमुल रवये पर गहरी चिंता वयक्त की। उन्होने बताया कि प्रशासन स्तर पर अभी तक कोई भी सुध नहीं ली जा रही है और इस प्रकार की चर्चाएं भी सुनने में आ रहा है कि विधानसभा चुनाव भी जल्दी होने वाले हैं यदि शीघ्र आचार संहिता लागु हो गई तो इस प्रकरण में और भी विलम्ब हो सकता है।आंदोलनकारी में भारी रोष व्याप्त है, यदि सरकार ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया तो शीघ्र ही एक बैठक कर आगामी उग्र रणनीति के लिए विचार विमर्श किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।



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