देहरादून, 26 जून ,उत्त्तराखंड राज्य आंदोलनकारी "सयुक्त मंच" ने राज्य सरकार द्वारा पारित दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अधिनयम बनने के बावजूद आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में नियुक्ति न मिलने पर गहरा अफसोस व्यक्त किया । संगठन ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए एक पत्र राज्य मंत्री व राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती चारू कोठारी के माध्यम से भेजा है। मंच द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार , उत्तराखंड सरकार ने " राज्य के आधीन सेवाओं " में राज्य आंदोलकारी एवं उनके आश्रितों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण अधिनियम 2023" को अगस्त 2024 में पारित कर प्रभाव में लाया गया था । उत्त्तराखंड राज्य आंदोलकारियों ने सरकार के इस साहसिक निर्णय के प्रशंसा की थी , लेकिन वास्विकता में इसके परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं । इस अधिनियम के लागु होने के पश्चात से आज तक पुरे राज्य में राज्य आंदोलनकारियों की केवल सात नियुक्तियां ही हो पायी है । पत्र में विभिन्न प्रशासनिक बाधाओं की और भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है जैसे कि अभियर्थियों को प्रमाण पत्र की तारीखों को लेकर परेशान करना, नाम में मामूली विसगंतियो के नाम पर आश्रितों को प्रताड़ित किया जा रहा हैं, सफल अभियर्थियों को सेवा नियमावली का हवाला देकर, चयन समिति द्वारा अंतिम प्रतीक्षा सूची का जारी नहीं किया जाना, विज्ञप्ति तिथि के बाद की रिक्तियों को आगे बढ़ाना के हवाला देकर , इस प्रकार के तकनीकी पहलू की आड़ में भृमित किया जा रहा है । सयुक्त मचं ने मुख्यमंत्री से पुरजोर मांग की प्रसाशन में हावी नौकरशाही द्वारा खड़ी की जा रही बाधाओ को शीघ्र दूर किया जाये, इसके लिए मंच ने मुख्यमंत्री से इन सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित समाधान हेतु के कैबिनेट कमेटी गठन करने का अनुरोध किया हैं, तांकि राज्य आंदोलनकारी व उनके आश्रितों को उनके हक़ में आंदोलनकारी के संघर्षो का सही रूप से न्याय मिल सके ।



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