अक्सर सरकारी स्कूलों के फैली अव्यवस्थाओ की खबरे सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल देवप्रयाग में स्थित पी एम श्री राजकीय प्राथमिक विद्यालय ने एक नई मिसाल पेश की है। आधुनिक सुविधाओं, अनुशासित परिवेश और रचनात्मक शिक्षण शैली के कारण यह विद्यालय पर नजर जाते ही अनायास आपको अपनी और आकर्षित करता है। विद्यालय का भौतिक परिवेश किसी भी उच्च स्तरीय निजी स्कूल जैसा प्रतीत होता है। परिसर में प्रवेश करते ही रंग-बिरंगी दीवारें और करीने से सजे गमले एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यहाँ स्वच्छता का स्तर इतना उत्कृष्ट है कि पूरे परिसर में कहीं भी गंदगी नजर नहीं आती। बच्चों के लिए पेंग्विन के आकार के डस्टबिन और बैठने के लिए आधुनिक बेंच प्रबंधन की सूक्ष्म दृष्टि को दर्शाते हैं। विद्यालय की कक्षाओं और बरामदों का उपयोग 'बाला' (Building as a Learning Aid) तकनीक के तहत किया गया है। दीवारों पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक, उत्तराखंड के राज्य प्रतीक, वर्णमाला और व्याकरण के नियमों को बहुत ही खूबसूरती से चित्रित किया गया है। यह विधि बच्चों को अनौपचारिक रूप से निरंतर सीखने में मदद करती है। वीडियो में बच्चों को मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देते देखा जा सकता है। यह केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व को तराशने का केंद्र बन चुका है। छात्र-छात्राओं का ड्रेस कोड (ट्रैक सूट और अनुशासन) उनकी सक्रियता और स्कूल के प्रति उनके लगाव को बयां करता है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय की इस कायाकल्प के पीछे प्रधानाध्यापक श्री विजय सिंह रावत और उनके सहयोगी स्टाफ की कड़ी मेहनत है। शिक्षकों का बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार और स्थानीय अभिभावकों का विद्यालय के प्रति बढ़ता विश्वास 'पी एम श्री' योजना की सफलता की पुष्टि करता है। जहाँ एक ओर पहाड़ों में पलायन के कारण सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, वहीं देवप्रयाग का यह विद्यालय एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। बेहतर प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन से कैसे एक प्राथमिक विद्यालय को आदर्श बनाया जा सकता है, यह यहाँ आकर देखा जा सकता है। यद्यपि यह रिपोर्ट हमारे द्वारा मार्च 2025 को तैयार की गयी थी लेकिन एक साल उपरांत भी यह स्कूल का प्रबंधन और मेंटिनेंस आज भी पिछले साल की भाँति हूबहू ही है ।



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