"टोल प्लाजा" पर भारी भरकम टोल चुकाने के बाद भी आम आदमी का सफर कितना सुरक्षित है ? यह एक बड़ा सवाल है, जनता से मिले फीड बैक और हमारी ग्राऊंड रिपोर्ट में देहरादून को हरिद्वार व ऋषिकेश से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग में जो खामियां सामने आई यह बहुत चौकाने वाली है। लच्छीवाला टोल प्लाजा क्रॉस करते ही कुछ दिन पूर्व हमें एक भारी-भरकम भूसे से लदे ट्रैक्टर को गलत दिशा से देहरादून को आते हुए दिखाई दिया, यह स्थिति तब है जब पूर्व में इस मार्ग पर शिव मंदिर के पास गलत दिशा में आते हुए वाहन के कारण भीषण सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि भूसे से लदे इस विशालकाय ट्रैक्टर पर कोई नंबर प्लेट तक नहीं है। टोल प्लाजा पार करते ही यह ट्रैक्टर देहरादून से हरिद्वार की ओर जाने वाली लेन में गलत दिशा से प्रवेश कर गया, और यहाँ पर अक्सर टोल प्लाजा क्रॉस करते ही कई वाहन गलत लेन में प्रवेश करते देखे जा सकते हैं, जबकि यहाँ पर कभी कभार ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ विभाग के कर्मचारियों को वाहनो के चालन करते हुए देखा जा सकता है, सवाल यह उठता है कि टोल प्लाजा क्रॉस करते ही कोई वाहन गलत दिशा में प्रवेश कैसे कर गया ? टोल प्लाजा से कुछ दुरी पर मणिमाई मंदिर स्थित हैं,यहाँ पर रोड़ की चौड़ाई काफी कम है और घुमाव ( Curve ) भी है, लेकिन यहाँ पर अक्सर बड़ी- बड़ी टूरिस्ट बसों के चालक अपने वाहन को रोड़ पर ही आड़ा तिरछा खड़ा कर देते है जिसके कारण यहाँ पर ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो जाती है, और दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है, इस विषय पर कुछ दिन पूर्व एनएचआई के साइट अभियंता द्वारा बताया गया यह ट्रैफिक व्यवस्था की समस्या है और हमारे विभाग से संबंधित नहीं है, हालांकि एनएचआई विभाग द्वारा टोल प्लाजा के पास इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है की टोल प्लाजा क्रॉस करने के बाद वाहन गलत लेन में प्रवेश ना कर सके ना ही मंदिर के पास वाहन चालकों को सावधान करने हेतु कोई काशन बोर्ड लगाए गए है, लच्छी वाला रेंज पार करने के बाद हर्रावाला में रिहाइशी व औद्योगिक क्षेत्र के पास हाइवे पर कंक्रीट बैरियर/ Obstcale की व्यवस्था ना होने से भारी भरमक बड़े - बड़े वाहन अक्सर सीधे कहीं से भी खतरनाक रूप से हाइवे पर प्रवेश कर जाते है जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है, इस पर एनएचआई के अधिकारी द्वारा बताया गया कई जगह कंक्रीट बैरियर कुछ लोगो द्वारा हटा दिए गए है तथा हमारे द्वारा उनको नोटिस भेजे गए है, जनाब आप नोटिस भेजते रहिए तब तक आम जनता अपनी जान खतरे में डाल कर सफर करती रहेगी । इसी क्रम में कुछ दूर आगे बढ़ने पर कुंआवाला पर बालावाला एवं दक्षिण दिशा की और जाने के लिए जो मध्य पास दिया गया है वहां पर वाहन चालकों को सावधान करने के लिए भी बीकन (Beacon ) /ट्रैफिक लाईट नहीं दिखाई पड़ती है, इस पर संबन्धित अधिकारी के द्वारा के द्वारा बताया गया की ट्रैफिक लाईट किसी भारी वाहन द्वारा तोड़ दी गयी शीघ्र ही दूसरी बीकन (Beacon ) /ट्रैफिक लाईट की व्यवस्था कर दी जायेगी, इसी प्रकार लक्ष्मण सिद्ध कॉलोनी, हर्रावाला के निकट एनएचएआई विभाग द्वारा मलवे के रूप में एकत्र की गयी कंक्रीट सामग्री का अवशेष के निस्तारण तथा उक्त मलवे के किये भंडारण के लिए निर्धारित किये गए स्थान के विषय पर पूछने पर संबन्धित अधिकारी द्वारा बताया गया इस मटीरियल का इस्तमाल सर्विस लेन के लिए किया जायेगा एवं एनएचआई के अधिकारी के अनुसार मलवे का भंडारण हरिद्वार से लेकर देहरादून तक हाइवे के किनारे कंही पर भी किया जा सकता है लेकिन हाइवे के मात्र आठ किमी के दायरे में मौजूद ये कमियां कब दूर कर दी जायगी इस के विषय पर एनएचआई के अधिकारी द्वारा कोई समय सीमा नहीं बताई गयी , सीमेंट मिक्सर ट्रकों के द्वारा हाइवे के कनारो पर जगह- जगह फेंके गए मलवे के बारे में उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया गया।
गौर करने वाली बात यह है कि यह तस्वीर तो हाईवे के मात्र 8 किलोमीटर के छोटे से दायरे की है। अब सवाल यह उठता है देहरादून से लेकर हरिद्वार (बहादराबाद टोल प्लाजा) तक के इस पूरी यात्रा में सुरक्षा की ऐसी कितनी और कमियां मौजूद होंगी , जो प्रत्येक दिन हजारो मुसाफिरों की जान जोख़िम में डाल रही हैं। यदि केवल 8 किलोमीटर के दायरे में लापरवाही का यह आलम है, तो पूरे हाईवे का अंदाजा लगाना काफी आसान है।"
निष्कर्ष यह है हाइवे के किनारे एकत्र किया गया व खुले आम फेंका हुआ कंस्ट्रक्शन वेस्ट, प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत के संकल्प को मटियामेट तो कर ही रहा है साथ ही हाइवे को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है एवं भारी टोल टैक्स चुकाने के बावजूद यात्रियों / मुसफ़िरो को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। कि यदि समय रहते इन छोटी-छोटी दिखने वाली बड़ी लापरवाहियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो भविष्य में इस हाइवे पर कोई भी बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।


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