स्पष्ट एक्सप्रेस। 7 नवंबर 2024
खेल के अतिरिक्त अन्य आयोजनों की पनाहगा बनकर रह गया पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम
एक ओर जहां भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने वर्ष 2036 में होने वाले ओलंपिक और पैरालंपिक की मेजबानी करने के हेतु देश की इच्छा व्यक्त करने सबंधित आशय पत्र अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को सोंपा है।जो की खेलो केआयोजन व खेलो को बढ़वा देने की दिशा में अच्छा कदम हैं।
👉 गत वर्ष पूर्व में खेल
मंत्री रेखा आर्य के द्वारा पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में फेली
अव्यवस्था से नारज होकर स्टेडियम को दुरस्त करने के दिशा निर्देश दिए थे ,
लेकिन अब कौन खेल मंत्री के आदेशो कीअवहेलना कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक बार फिर से अव्यवस्था फैला कर आम जनता के टेक्स के पैसो की बर्बादी पर उतारू है ।
👉 कैमरे की नजर में पूर्व में आयोजित विशाल कार्यक्रम से पहले व कार्यक्रम के बाद का पूर्णानंद स्टेडयम
बावजूद इसके धरातल में उत्तराखंड के मुनि की रेती नगर पालिका में सिथत पूर्णानंद मिनी स्टेडियम, खेल मैदान धार्मिक आयोजनों, आंदोलन, भाषण बाजी, यात्री सीजन में टूरिस्ट बसों की पार्किंग की पनाह गाह बना रहता है।
सांस्कृतिक एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित होने के कुछ दिन बाद स्पोर्ट्स स्टेडियम की झलकी। करोना काल के बाद से ही स्पोर्ट्स स्टेडियम में लगातर इस तरह के आयोजन किये जा रहे है।
बावजूद इसके धरातल में उत्तराखंड के मुनि की रेती नगर पालिका में सिथत पूर्णानंद मिनी स्टेडियम, खेल मैदान धार्मिक आयोजनों, आंदोलन, भाषण बाजी, यात्री सीजन में टूरिस्ट बसों की पार्किंग की पनाह गाह बना रहता है।
सप्ताह
भर के आयोजन के लिए एक माह पहले आयोजन की तैयारी के लिए खेल मैदान में
टेंट लगाने के लिए खुदाई शुरू हो जाती है। उसके बाद जब आयोजन समाप्त हो
जाता है तो कुछ दिन टेंट उखाड़ने में लग जाते हैं। उसके बाद खेल मैदान
कीचड़, गड्ढों गंदगी व ईंट-पत्थरों से अटा पड़ा रहता है। मानों खेल मैदान
में तबाही आई हो। ऐसे में हमारे पहाड़ी
युवा स्टेडियम में जाने की आस में आंखों में चमक लिए बमुश्किल पहाड़ी
क्षेत्र से यहां आते हैं और स्टेडियम के नाम पर रणक्षेत्र का मैदान पाकर
मजबूरन पलायन का मार्ग पकाने को मजबूर हो जाते हैं।
ढालवाला,
मुनिकीरेती, तपोवन उत्तराखंड राज्य का एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है, लेकिन पूर्णानंद मिनी स्टेडियम यहाँ के बच्चों के खेलने के लिए यहां एकमात्र
स्टेडियम तथा एक मात्र खेल का मैदान है। लेकिन इस स्टेडियम हर दूसरे
तीसरे महीने कल्चर, धार्मिक कार्यक्रमों, निवेशक शिखर सम्मेलनों एवं टूरिस्ट सीजन के दौरान टूरिस्ट बसों की पार्किंग के नाम पर खेल गतिविधियों पर समय-समय पर प्रतिबन्ध लगा रहता है। स्टेडियम में इस
तरह की गतिविधियां इसके निर्माण पूर्ण होने के कुछ दिन बाद ही आरंभ हो गयी थी। इस तरह के कार्यक्रमों को आयोजित करने हेतु मुनिकीरेती, तपोवन क्षेत्र में काफी संख्या में आश्रम व धर्मशालाएं व सरकारी गेस्ट हाउस मौजूद हैं, फिर भी विशाल सत्संग के लिए इस स्टेडियम को क्यों आवंटित किया जा रहा है ।
पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम जो यहां के स्थानीय बच्चों की खेल गतिविधियों को पूरा करने के लिए पूर्णानंद
ट्रस्ट द्वारा उत्तराखंड सरकार को आवंटित किया गया था। यहां पर नगर पालिका मुनि की
रेती तपोवन ग्राम पंचायत और गंगा नदी के दूसरी साइड स्थित जमकेश्वर ब्लॉक
के भी स्थानीय युवा व बच्चे के लिए खेल व अन्य शारीरिक गतिविधियों में
हिस्सा लेने के लिए एकमात्र स्टेडियम व ग्राउंड पूर्णानंद स्टेडियम है ।
यहां पर खेल गतिविधियों के अलावा स्थानीय एवं आसपास के पहाड़ी क्षेत्र से
आने वाले युवा जो आसपास फैक्ट्री, होटल में व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान
में कार्य करते हैं तथा साथ-साथ में सरकारी नौकरी की भी तैयारी करते हैं
उनके लिए भी यह स्टेडियम फिजिकल ट्रेनिंग के लिए एक मात्र क्रीड़ा का मैदान है ।
इस स्टेडियम में विभिन्न खेलों के लिए संविदा स्तर पर कोच अप्वॉइंट किए
गए हैं, वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी, खो खो, बेसबॉल, जूडो कराटे और बैडमिंटन
इत्यादि खेल के लिए यहां पर सैकड़ो बच्चे सुबह शाम प्रैक्टिस के लिए आते
हैं जिनके लिए सरकारी स्तर पर हर साल संविदा पर कोच भी रखे गए हैं।
टिहरी जिला का डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स कार्यालय नरेंद्र नगर में स्थित
है पूर्व में जब भी इस
स्टेडियम में ऐसे आयोजन होते रहे हैं तब भी खेल विभाग द्वारा यहां के युवा
हुआ बच्चों के खेल व शारीरिक गतिविधिया नेरेंद्नगर में आयोजित की जाएगी
इस प्रकार का हवाला दिया जाता रहा है लेकिन सैकड़ो बच्चों को नरेंद्र नगर
के एकमात्र ग्राउंड में शिफ्ट करना असंभव है, तथा खेल विभाग विभाग द्वारा
पहले भी इस तरह की खानापूर्ति की जा चुकी है। जबकि खेलो को बढ़वा देने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा खेलो इंडिया का नारा दिया गया है ।
यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं
होगी कि पिछले
कुछ वर्षो से जब
से इस स्टेडियम का
निर्माण हुआ है, स्टेडियम
में
इस तरह के कार्यक्रम
आयोजित करवाकर खेल
को बढावा देने के नाम
पर स्थानीय युवा होते खिलाडियों
के साथ एक भद्दा मजाक
किया जा
रहा है ।
एक बार फिर इस स्टेडियम में अक्तूबर के 22 तारीख से स्टेडियम में बड़े-बड़े तब्बू गाड़ दिये जा चुके हैं, दिनांक
7 नवंबर
से 15 नवंबर
तक चलने
वाले सत्संग महोत्सव
के कारण एक बार फिर स्थानीय युवा
वर्ग को स्टेडियम से
मायूस होकर वापस
लोटना
होगा ।
आशा है इस भौगोलिक विषम परिस्थितियों वाले
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी स्थानीय विधायक व वन मंत्री सुबोध उनियाल जो '' नेता जी'' के नाम से चर्चित है एवं युवा
विकास का चेहरा है, वह इस विषय पर तुरंत ध्यान देंगे कि स्थानीय युवाओ को खेल मैदान के अभाव में अपनी
खेल प्रतिभाओं को सँवारने के लिए अन्य प्रदेशों में जाकर दर-दर की
ठोकरे ना खानी पड़े एवं इस खबर पर तुरंत संज्ञान लेकर इस तरह की आयोजन स्टेडियम में करने
पर अविलंब प्रतिबंध लगाएगे ।
यदि उत्तराखंड सरकार खेलो के प्रति गंभीर है तो पूर्व में उक्त स्टेडियम में सास्कृतिक एवं धार्मिक व अन्य कार्यक्रम से सरकार को जो भी आमदनी हुई है , वह खेल के इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित
करने में खर्च कर उसका ब्यौरा यहाँ की आम जनता के साथ सावर्जनिक करेगी ।
👉
स्थानीय युवा खिलाड़ियों व विभिन्न खेलो से जुड़े खेल प्रेमियों, कोचों
ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां पर इस तरह के आयोजन पहले भी
होते रहे हैं और इस कारण महीनों तक स्टेडियम में खेल गतिविधियों पर रोक लग
जाती है, इस क्षेत्र के खिलाडियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है आखिर स्पोर्ट्स स्टेडियम में अन्य तहर के कार्यक्रम आयोजित करवाने से खेल विभाग को क्या लाभ प्राप्त हो रहा है ।
जिला खेल अधिकारी मुनिकीरेती दीपक रावत से इस संबंध में बात करने पर
उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे से इस बात को ध्यान में रखते हुए इस तरह के
आयोजनों पर रोक लगाई जाएगी, इसकी रोकथाम के लिए एक - दो दिन में निदेशालय
को भी पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा।







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