ऐसे में हमारे पहाड़ी युवा स्टेडियम में जाने की आस में आंखों में चमक लिए बमुश्किल पहाड़ी क्षेत्र से यहां आते हैं और स्टेडियम के नाम पर रणक्षेत्र का मैदान पाकर मजबूरन पलायन का मार्ग पकाने को मजबूर हो जाते हैं।
ढालवाला, मुनिकीरेती, तपोवन घनी आबादी वाला क्षेत्र है, पिछले कुछ वर्षों से यहां पर आबादी बुरी तरह से बड़ी है। पर बच्चों के खेलने के लिए यहां एकमात्र स्टेडियम तथा एक मात्र खेल का मैदान है। लेकिन यह स्टेडियम हर दूसरे तीसरे दिन कल्चर व धार्मिक कार्यक्रमों से घिरा रहता है। स्टेडियम में इस तरह की गतिविधियां पहले से होती आ रही हैं। मुनिकीरेती, तपोवन क्षेत्र में सैकड़ो की संख्या में आश्रम व धर्मशालाएं हैं जहाँ पर इस तरह के आयोजन किये जा सकते है , जिसके लिए यह क्षेत्र विश्व विख्यात भी है, साल भर यहाँ तीर्थ यात्रियों व साहसिक क्रीडा गतिविधियों का आनंद लेने के लिए लाखो की संख्या मे टूरिस्ट आते है लेकिन इसके बाद भी स्थानीय नागरिक के लिए सुविधांओ की भयंकर रूप से कमी है। अब इस क्षेत्र का एकमात्र एकमात्र स्टेडियम स्थानीय युआ वर्ग, खिलाडियों व स्थानीय नागरिको की भावनों के साथ खिलवाड़ करते हुए इस स्टेडियम को सत्संग क्यों आवंटित किया जा रहा है जबकि इस स्टेडियम में मुनिकीरेती नगर पालिका और तपोवन नगर पंचायत क्षेत्र में और यमकेश्वर ब्लॉक से भी यहां पर सेकड़ो की संख्या में बच्चे क्रीड़ा एवं शारीरिक अभ्यास के लिए आते हैं।
यह स्टेडियम पिछले 22 अक्टूबर से एक विशाल सत्संग के लिए आरक्षित हो गया है जो की 5 नवंबर से शुरू होना है और उसके लिए 22 अक्टूबर से बड़े-बड़े टेंट लगने शुरू हो गए हैं और ग्राउंड में गड्ढे विशाल टेंट के लिए गड्ढे हुआ लैट्रिन बाथरूम जाने के लिए भी स्टेडियम के अंदर जगह-जगह खुदाई की जा रही है और तकरीबन एक महीने के लिए यह स्टेडियम मुरारी बापू के सत्संग के लिए के आरक्षित हो गया है, और ऐसा आयोजन यहां पर पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी यहां पर इस तरह के आयोजन हो चुके हैं जिस कारण यह स्टेडियम एक-एक महीने तक आरक्षित हो जाता है और यहां पर संचालित होने वाली खेल गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है , उत्तराखंड का अधिकांश पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण तथा विषम भौलिक क्षेत्र होने के कारण बच्चों के खेलने के लिए खेल मैदान की पहले ही काफी कमी है यह यूं कह सकते हैं कि खेल के नाम पर यहां सुविधा नाम मात्र से भी कम है।
पिछले कुछ वर्षों में मुनि की रेती ऋषिकेश के आसपास क्षेत्र में जनसंख्या का दबाव बहुत तेजी से बड़ा है, आज हमारे क्षेत्र के बच्चे खेल मैदान के अभाव में खेल एक्टिविटी की कमी में युवाओं का व्यक्तित्व विकास और शारीरिक विकास पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुका है तथा अधिकतर युवा नशे की गर्त में जा रहे हैं।
पूर्णानंद स्टेडियम जो यहां के स्थानीय बच्चों के लिए कीड़ा गतिविधियों के लिए पूर्णानंद ट्रस्ट द्वारा सरकार को आवंटित किया गया था यहां पर नगर पालिका मुनि की रेती तपोवन ग्राम पंचायत और गंगा नदी के दूसरी साइड स्थित जमकेश्वर ब्लॉक के भी स्थानीय युवा वर्ग जो पार्ट टाइम जॉब के साथ-साथ राज्य सरकार व केंद्र सरकार के कई विभागों में नौकरी के लिए, सेना में भर्ती के लिए अथवा अन्य अन्य शारीरिक दक्षता में निपूर्ण होने के लिए अभ्यास की जगह तलाशते रहते हैं, उनके लिए यह एकमात्र स्टेडियम व ग्राउंड पूर्णानंद स्टेडियम है । यहां पर खेल गतिविधियों के अलावा स्थानीय एवं आसपास के पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले युवा जो आसपास फैक्ट्री, होटल में व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान में कार्य करते हैं तथा साथ-साथ में सरकारी नौकरी की भी तैयारी करते हैं उनके लिए भी यह स्टेडियम फिजिकल ट्रेनिंग के लिए मुफीद है या एकमात्र स्थान है इस स्टेडियम में विभिन्न खेलों के लिए संविदा स्तर पर कोच अप्वॉइंट किए गए हैं, वॉलीबॉल फुटबॉल हॉकी को को बेसबॉल जूडो कराटे और बैडमिंटन इत्यादि खेल के लिए यहां पर सैकड़ो बच्चे सुबह शाम प्रैक्टिस के लिए आते हैं जिनके लिए सरकारी स्तर पर हर साल संविदा पर कोच भी रखे गए हैं परन्तु खेल मैदानों के इस तरह के आयोजनों से घिरे रहने के कारण उन कोचों का होना भी व्यर्थ है।
टिहरी जिला का डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स कार्यालय नरेंद्र नगर में स्थित है और यहाँ पर भी एक छोटा पुलिस का ग्राउंड है जो की केवल लगभग 90 x 50 गज है जो की नरेन्द्रनगर पालिका क्षेत्र के बच्चो की खेल गतिविधियो के लिये भी पूरा नही है ,यदि इस सत्संग की आयोजन के समय हम बात करें कि नरेंद्र नगर में इस दौरान पूर्णानन्द स्टेडियम में प्रेक्टिस करने वाले बच्चों की खेल गतिविधियों को नरेंद्र नगर में में शिफ्ट किया जाएगा तो यह सरासर स्थानीय बच्चों वह यहां युवाओं के साथ अन्याय है क्योंकि नरेंद्रनगर मुनि की रेती तपोवन से 16 किलोमीटर दूर स्थित है और पूर्व में जब भी इस स्टेडियम में ऐसे आयोजन होते रहे हैं तब भी खेल विभाग द्वारा यहां के युवा हुआ बच्चों के खेल व शारीरिक गतिविधिया नेरेंद्नगर में आयोजित की जाएगी इस प्रकार का हवाला दिया जाता रहा है लेकिन सैकड़ो बच्चों को नरेंद्र नगर के एकमात्र ग्राउंड में शिफ्ट करना असंभव है, तथा खेल विभाग विभाग द्वारा पहले भी इस तरह की खानापूर्ति की जा चुकी है। यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पिछले कुछ वर्षो से जब से इस स्टेडियम का निर्माण हुआ है, स्टेडियम में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करवाकर खेल को बढावा देने के नाम पर स्थानीय युवा होते खिलाडियों के साथ एक भद्दा मजाक किया जा रहा है ।
जबकि प्रधानमंत्री जी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी , उत्तराखंड खेल मंत्री रेखा आर्य वनमंत्री जो की स्थानीय विधानसभा के विधायक सुबोध उनियाल , ऋषिकेश विधायक प्रेम चन्द्र अग्रवाल खेल के लिए पूरी तरह समर्पित है और इसी क्रम में प्रधानमंत्री द्वारा खेलो को बढावा देने हेतु खेलो इंडिया का नारा दिया गया है,प्रदेश के मुख्यमंत्री , व खेल मंत्री युवाओं को खेल की तरफ आकर्षित करने के लिए विभिन्न तरह की योजनाएं लाने में प्रयासरत है। फिर भी इस स्टेडियम बड़े-बड़े टेंट लगने शुरू हो गए थे जो की दिनांक 7 नवंबर से 15 नवंबर तक चलने वाले सत्संग महोत्सव के कारण एक बार फिर स्थानीय युवा वर्ग को स्टेडियम से मायूस होकर वापस लोटना होगा ।
आशा है इस भौगोलिक विषम परिस्थितियों वाले राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी स्थानीय विधायक व वन मंत्री सुबोध उनियाल जो कि नवयुवको में अच्छे खासे लोकप्रिय नेता है एवं युवा विकास का चेहरा है, वह इस विषय पर तुरंत ध्यान देंगे कि स्थानीय युवाओ को खेल मैदान के अभाव में अपनी खेल प्रतिभाओं को सँवारने के लिए अन्यप्रदेशों में जाकर दर-दर की ठोकरे ना खानी पड़े। एवं सरकार इस खबर पर तुरंत संज्ञान लेकर इस तरह की आयोजन स्टेडियम में करने पर अविलंब प्रतिबंध लगाएगी, एवं पूर्व में जो सास्कृतिक एवं धार्मिक आयोजनों से सरकार को आमदनी हुई है , वह खेल के इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में खर्च कर उसका ब्यौरा आम जनता के सामने सावर्जनिक करेगी ।
👉 स्थानीय युवा खिलाड़ियों व विभिन्न खेलो से जुड़े खेल प्रेमियों, कोचों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां पर इस तरह के आयोजन पहले भी होते रहे हैं और इस कारण महीनों तक स्टेडियम में खेल गतिविधियों पर रोक लग जाती है, जो की इस क्षेत्र के खिलाडियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।
जिला खेल अधिकारी मुनिकीरेती दीपक रावत से इस संबंध में बात करने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे से इस बात को ध्यान में रखते हुए इस तरह के आयोजनों पर रोक लगाई जाएगी, इसकी रोकथाम के लिए एक - दो दिन में निदेशालय को भी पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा।
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