श्यामपुर, 28 अगस्त 2024: श्यामपुर में हरिद्वार ऋषिकेश हाइवे पर स्थित ग्रीन चीली रेस्टोरेंट में स्थानीय लोगों की सूचना पर देवभूमि ऋषिकेश संघर्ष समिति के सदस्यों ने भारी मात्रा में शराब पकड़ी। जबकि, पुलिस को बार-बार फोन करने के बावजूद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। ग्रीन चीली रेस्टोरेंट से श्यामपुर चौकी मात्र कुछ दूरी पर है।
देवभूमि ऋषिकेश संघर्ष समिति के सदस्यों को सूचना मिली थी कि हरिद्वार ऋषिकेश हाइवे पर स्थित ग्रीन चीली रेस्टोरेंट में लोगों को अवैध रूप से शराब परोसी व बेची भी जाती है। सूचना पर आज 28 अगस्त को समिति के सदस्य वहां पहुंचे तो देखा कि रेस्टोरेंट में खुलेआम ग्राहकों को शराब परोसी और बेची जा रही थी। समिति के सदस्यों को देखकर वहां हडकंप मच गया तथा शराब पीने वाले और लेने वालों के साथ ही रेस्टोरेंट संचालक वहां से रफू चक्कर हो गए। समिति ने वहां पर भारी मात्रा में शराब पकड़ी। जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। मगर सूचना के बावजूद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। जिसके बाद समिति के लोगों ने पकड़ी गई शराब की बोतलें, अद्धे व पव्वे तोडकर वहीं पर नष्ट कर दिए। समिति के अरविंद हटवाल, वीरेंद्र विष्ट, योगेश डिमरी ने कहा कि पुलिस को कई बार फोन किया गया, मगर पुलिस मौके पर नहीं आई। इसलिए पकड़ी गई शराब को वहीं पर तोड़कर नष्ट कर दिया गया। उन्होंने पुलिस और आबकारी विभाग पर मिली भगत का आरोप भी लगाया है।
कर्णप्रयाग, 28 अगस्त 2024: डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्णप्रयाग में आज युवा संसद का सफलतापूर्वक गठन किया गया। महाविद्यालय में युवा संसद समिति के संयोजक, डॉ. कीर्तिराम डंगवाल ने बताया कि इस युवा संसद में विभिन्न पदों के लिए छात्रों का चयन किया गया। प्रज्ञा खंडूरी को अध्यक्ष, शुभम ममगाईं को प्रधानमंत्री, रीना को महासचिव, अंजलि को शिक्षा मंत्री, दिनेश को स्वास्थ्य मंत्री, कपिल रावत को नेता प्रतिपक्ष, अजय पाटिल को विदेश मंत्री, लवली को खेल मंत्री, और सलोनी को वित्त मंत्री के रूप में नामित किया गया।
हल्द्वानी, 28 अगस्त 2024: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी द्वारा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, पौड़ी परिसर में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य दिव्यांग और शोषित वंचित जनों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था, जिसमें आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को भी जागरूक किया गया।
कार्यशाला का नेतृत्व विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सिद्धार्थ कुमार पोखरियाल ने किया। उन्होंने शोध योजना के विषय में जानकारी दी और आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को दिव्यांग जनों के प्रति समाज की जिम्मेदारी और उनकी समस्याओं के निराकरण के उपायों से अवगत कराया। पोखरियाल ने शिक्षा को दिव्यांग जनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कारक बताया और सरकार द्वारा किए गए प्रयासों, कानूनों और उपागमों की जानकारी भी दी।
विशेष विभाग के सहायक प्राध्यापक तरूण नेगी ने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दिव्यांग और शोषित वंचित वर्ग के जनों को शिक्षा प्राप्त करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य अतिथि, प्रभारी निदेशक प्रोफेसर अनीता रूडोला ने मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुक्त विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के नए कीर्तिमानों को छुएगा। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए शिक्षा का प्रचार-प्रसार करें। कार्यशाला के अंत में धन्यवाद ज्ञापन सत्येंद्र नेगी द्वारा दिया गया। इस कार्यशाला में पौड़ी ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
हल्द्वानी, 28 अगस्त 2024: डिजिटल युग में तकनीक ने जीवन को सरल और सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। विशेषकर, सीनियर सिटीजन इस तकनीकी क्रांति के प्रभावों को समझने में अक्सर कठिनाई महसूस करती है, जिससे वे साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन जाते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऑनलाइन फ्रॉड एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। धोखेबाज विभिन्न प्रकार की योजनाओं का सहारा लेते हैं, जैसे फर्जी कॉल, ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, और सोशल मीडिया के माध्यम से लिंक भेजना, जिनके जरिये वे निजी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप वरिष्ठ नागरिकों की जीवनभर की बचत और गोपनीयता खतरे में पड़ जाती है।
एक प्रमुख कारण यह है कि वरिष्ठ नागरिक व्यक्ति अक्सर नई तकनीकों और डिजिटल उपकरणों का पूरी तरह से उपयोग करने में सहज नहीं होते। इसके अतिरिक्त, वे ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक नहीं होते और न ही उन तक इस तरह की जानकारी पहुँचाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए जाते हैं। कई बार, वे इस बात का भी अंदाजा नहीं लगा पाते कि कौन सी जानकारी सार्वजनिक करनी है और कौन सी नहीं। इसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी उन्हें फंसाने में सफल हो जाते हैं।
इस चुनौती का समाधान करने के लिए हमें सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। सबसे पहले, सीनियर सिटीजन को साइबर सुरक्षा के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए सामुदायिक संगठनों, सरकार और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलकर कार्य करना होगा। ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई और सख्त साइबर कानून भी आवश्यक हैं।
इसके अतिरिक्त, परिवार और समुदाय के सदस्यों को भी इस दिशा में जागरूकता फैलाने और वरिष्ठ नागरिकों की मदद करने की जिम्मेदारी उठानी होगी। सीनियर सिटीजन को तकनीक से डरने के बजाय उसे समझने और सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रेरित करना होगा।
अंततः, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सीनियर सिटीजन डिजिटल दुनिया में भी सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा जीवन जी सकें। इसके लिए साइबर सुरक्षा और जागरूकता के प्रयासों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। केवल तब ही हम एक सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल समाज का निर्माण कर सकेंगे, जहां हमारे वरिष्ठ नागरिक भी सम्मान और सुरक्षा के साथ रह सकें।
(लेखक अंकित तिवारी शोधार्थी, अधिवक्ता एवं पूर्व विश्वविद्यालय प्रतिनिधि हैं।)