प्रेम, करुणा व धार्मिकता के प्रतीक हैं भगवान श्रीकृष्ण
देहरादून, 26 अगस्त 2024: रूद्रलोक एनक्लेव कीर्तन मंडली ने हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया। रूद्रलोक एनक्लेव के नन्हें मुन्हें बच्चों ने राधा कृष्ण के वेष भूषा में मनमोहक नृत्य भी प्रस्तुत किए।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर बच्चों ने कृष्ण और सुदामा की दोस्ती से संबंधित नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की। नन्हें-मुन्हें बच्चों के जीवंत अभिनय ने लोगों को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान महिलाओं ने लड्डू गोपाल को भोग लगाया और झुलाया। कीर्तन मंडली की अध्यक्षा प्रियंका नेगी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा व धार्मिकता के प्रतीक हैं।
इस दौरान रीता सेमवाल, सरिता पेटवाल, कल्पना कपरवान, संगीता बिष्ट, दीपा रावत, उर्मिला रौथाण, अनीता वशिष्ठ, दीपा गुसाई, सरिता बेंजवाल, कौशल्या, शोभा नेगी, कमला राणा आदि मौजूद रहे।
देहरादून, 25 अगस्त 2024: जंगल की जैव विविधता और खेती के लिए अभिशाप बने लैंटाना (लैंटाना कैमरा) निकट भविष्य में खेती के लिए वरदान साबित हो सकता है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च हिमालयी पादप शोध संस्थान ने लैंटाना का कारगर उपयोग खोज निकाला है। हैप्रेक के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि लैंटाना के पत्तों के तेल से कीटनाशक तैयार किया जा सकता है। अगर इसका उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाए तो इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
लॅन्टाना मध्य और दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाली एक घनी शाखाओं वाली झाड़ी है जो सघन गुच्छों, घने झाड़ियों और रेंगने वाली और चढ़ने वाली लताओं के रूप में विकसित हो सकता है। यह देशी वनस्पतियों को दबा सकता है और अभेद्य स्टैंड बना सकता है। उत्तराखंड के पहाड़ों पर पैर पसार चुकी इस घास से लोग परेशान हैं।
हैप्रेक के शोधकर्ताओं का कहना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लैंटाना (लैंटाना कैमरा) तेजी से फैल रहा है। लैंटाना लगभग 24 प्रतिशत वन क्षेत्र में फैल चुका है। इसके चलते लैंटाना वन क्षेत्र की जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रहा है। हैप्रेक के शोधार्थी डॉ. जयदेव चौहान ने बताया कि लैंटाना पर शोध के दौरान पता चला है कि इसके पत्तों से निकलने वाला तेल फसल में कीटनाशक के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
लैंटानाका तेल निकालने के लिए ग्रामीण ऑयल कलेक्शन यूनिट स्थापित कर सकते हैं। इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। पत्तों का तेल निकालने से पहले उन्हें दो घंटे तक सुखाना होता है, जिसके बाद तेल निकाला जा सकता है.हालांकि तेल की मात्रा कम होती है, लेकिन यदि पत्तों की अधिक मात्रा उपलब्ध हो, तो तेल की मात्रा भी बढ़ाई जा सकती है।
लैंटानाके एक मिलीलीटर तेल को 20 लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव किया जा सकता है। इस घोल का उपयोग फसल, अमरूद, अनार और अन्य फलदार पौधों पर भी किया जा सकता है, जिससे फलों में कीड़े नहीं लगेंगे।
सार्थक पहल।
देहरादून, 25 अगस्त 2024: दिल्ली के बुराड़ी में अब केदारनाथ धाम मंदिर नहीं बनेगा। इसकी घोषणा श्रीकेदारनाथ धाम दिल्ली ट्रस्ट ने की है। इस मुद्दे पर प्रदेश के धर्मावलंबियों के साथ कांग्रेस ने विरोध किया था। प्रदेश सरकार ने भी धामों के नाम का दुरुपयोग रोकने के लिए कठोर कानून लाने का कैबिनेट में निर्णय लिया था।
केदारनाथ धाम की तर्ज पर दिल्ली में केदारनाथ मंदिर बनाने के लिए 10 जुलाई को शिलान्यास किया गया था। अगले ही दिन से इस मामले में उत्तराखंड में भारी विरोध देखने को मिला।चारधामों के पंडा-पुरोहितों ने इसका विरोध किया, इस मुद्दे पर कांग्रेस भी मुखर हो गई। कांग्रेस ने केदारनाथ प्रतिष्ठा रक्षायात्रा भी निकाली। जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और चारधामों के नाम का दुरुपयोग रोकने के लिए कठोर कानून बनाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री का कहना था कि देश में केदारनाथ धाम एक ही है और एक ही रहेगा।
श्रीकेदारनाथ धाम दिल्ली ट्रस्ट की अध्यक्ष सुमन मित्तल ने बताया, पूर्व में सभी ट्रस्ट्री ने मिलकर दिल्ली के बुराड़ी में केदारनाथ मंदिर का निर्माण करने का निर्णय लिया था। लेकिन उत्तराखंड के लोगों के विरोध और धार्मिक भावनाओं को देखते हुए मंदिर का निर्माण नहीं किया जाएगा। केदारनाथ धाम ट्रस्ट को बंद करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। श्री केदारनाथधाम ट्रस्ट की ओर से इसी साल 10 जुलाई को दिल्ली के बुराड़ी में केदारनाथ धाम मंदिर का शिलान्यास किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए थे, तभी से आमजन से लेकर कांग्रेस ने भी इसका पुरजोर विरोध किया था।