स्पष्ट एक्सप्रेस 9 अक्टूबर 2023
संपादकीय: उत्तराखंड में मूल निवास एवं भू- कानून का मुद्दा अब क्यों उठने लगा है, ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड के मूल निवासी उत्तराखंड के बनने के बाद बाहरी राज्यों से आने वाले और उत्तराखंड में स्थाई रूप से रहने वाले ईमानदार, न्याय व्यवस्था कानून पर विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय व्यक्तियों का विरोध कर रहे हैं, उत्तराखंड में रहने वाले वह सभी आम जनमानस जिन्होंने उत्तराखंड बनाने के लिए उत्तराखंड आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था ,और सभी का एक ही सपना था, अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड राज्य विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा , स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, पहाड़ी इलाकों में रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे, पहाड़ी क्षेत्रों में दूर दराज की इलाकों में रहने वाले निवासियों को चिकित्सा एवं शिक्षा के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा, पहाड़ों में पलायन रोकने के लिए विशेष नीति बनाई जाएगी, परंतु उत्तराखंड बनने के बाद कागजों में योजनाएं तो बहुत बनी परंतु पिछले 20 वर्षों में ये योजनाएं धरातल पर कार्यान्वित नहीं हो पाई ,आज उत्तराखंड में जितने भी बड़े-बड़े प्रोजेक्ट है, वह सब भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं , विगत वर्षों में देखने में आया है कमजोर राजनीतिक नेतृत्व लाचार कानून व्यवस्था के कारण , इसका फायदा भ्रष्ट और कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले , चाहे वह उत्तराखंड में निवास कर रहा हो या उत्तराखंड से बाहर उनकी गिद्ध दृष्टि ने यहां की कमजोर कानून व्यवस्था को उत्तराखंड बनने की शुरुआती दिनों में ही भांप लिया था , और कैसे उत्तराखंड में अपने कुकर्मों को अंजाम देकर करोड़ अरबो रुपए की संपत्ति इकट्ठी की जा सकती है, कि उत्तराखंड आए दिन जिस तरह से उत्तराखंड में घोटाले हो रहे हैं जब उत्तराखंड बना था उसी समय सबसे पहले दरोगा भर्ती घोटाला से उत्तराखंड राज्य का खाता खुल गया था घोटाले की लिस्ट बहुत लंबी है उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के नामी वकील विरमानी अपने साथियों के साथ
सरकार की नाक के नीचे रजिस्ट्री ऑफिस के भ्रष्ट सरकारी
कर्मचारियों के साथ मिलकर अपने अपने कुकर्मों को कब से अंजाम दे रहा था
शायद ही इसका पता चल पाए, विरमानी, और उसके कुकर्मों में साथ देने वाले व्यक्तियों की गिरफ्तारी दो अंको को पार कर चुकी है, आज उसका एक साथी अजय मोहन पालीवाल के कुकर्मों का कला चिट्ठा न्यूज पेपरो में भरा पड़ा है, अब तो यह जांच का विषय है कि उक्त अजय मोहन पालीवाल फॉरेंसिक राइटिंग
स्पेशलिस्ट की नागालैंड यूनिवर्सिटी की डिग्री कहीं फर्जी तो नहीं है इस तरह की व्यवस्था को देखकर आम आदमी जिन्होंने कभी सपने देखे थे शांतिप्रिय राज्य उत्तराखंड में कानून व्यवस्था का राज होगा , आम जनमानस का उत्तराखंड के राजनीतिक नेतृत्व से विश्वास ही टूट गया है, उससे तो लगता है, ऐसा नहीं है कि इन घोटालेबाजी घोटाले बाजो ,भूमाफियों का शिकार केवल मूल निवासी ही है, देश के अन्य अन्य प्रदेशों में रहने वाले व्यक्ति जिन्होंने कभी उत्तराखंड की शांत वादियों में रहने के सपने बुने थे, वह भी इनकी धोखाधड़ी के शिकार हो गए , उत्तराखंड में केवल यहां के मूल निवासी ही नहीं अपितु कई शांतिप्रिय लोग जो अन्य राज्यों से आकर यहां बसे हैं उनको भी कहीं ना कहीं कमजोर कानून व्यवस्था अपरिपक्व अकर्मण्य राजनीतिक नेतृत्व, का खामियाजा किसी ना किसी रूप में उठाना पड़ा है , जो उत्तराखंड बनने के बाद सत्ता पर बैठे वह भी इसी राज्य के मूल निवासी थे और और आज भी वही मूल निवासी हैं जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे है पर नतीजा आज भी सिफर है , उत्तराखंड आंदोलन में भाग लेने वाले आम जनमानस अब यह सोचने पर मजबूर है आखिर हमें उत्तराखंड बना कर क्या मिला और उसी उसी का विरोध अब मूल निवास एवं भू कानून के रूप में देखने को मिल रहा है ।
पिछले वर्ष अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस तरह से जघन्य अपराध करने वालों की राजनीतिक पहुंच देखी गई और उसके बाद कुछ भेड़िए जिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था उन्होंने अपने बयान जारी किए , इस हत्याकांड के बाद आम जनता में जो आक्रोश देखा गया यह सब कमजोर राजनीतिक नेतृत्व के प्रति आम जनता का गुस्सा था, ऐसा नहीं कि यहां पहली बार हुआ है इससे पहले भी उत्तराखंड में जघन्य हत्याकांड हो चुके हैं, परंतु आम जनता न्याय, के भरोसे बैठी रही और अंकिता भंडारी केस में भी शुरुआत में दबाने की कोशिश की गई, परंतु आम जनता के विरोध के कारण सत्ता को आनंन फ़ानन में आम जनता के वोटो को ध्यान में रखते हुए एक्शन लेना पड़ा, इस तरह के कृत्य करने वालों को उत्तराखंड सरकार का कितना डर है हाल के दिनों में घटित हुई घटना जब राजाजी रिजर्व फॉरेस्ट ऋषिकेश, की सीमा के अंदर स्थित नीरज रिजॉर्ट में तकरीबन 30 से ऊपर कसीनो खेलते हुए धन्नासेठ,पूँजीपति एवं उनको अवैध रूप से जो बार- बालाये मदिरा परोस रही थी पुलिस द्वारा छापा मार कर पकड़ा गया , और फिर 2 दिन बाद ही उनको जमानत मिल गई, पिछले साल इसी राजा जी फॉरेस्ट रिजर्व एरिया में पुलकित आर्य के रिसोर्ट में अंकिता भंडारी जगन्य हत्याकांड हुआ था , उसके बाद भी सरकार द्वारा की सख्ती, के बाद भी इस तरह के कुकर्म यहां आयोजित किया जा रहे हैं , फॉरेस्ट रिजर्व एरिया में अवैध रूप से मदिरा पिलाई जा रही थी और फॉरेस्ट अधिकारियों को इस बात की खबर भी नहीं हुई , इससे अधिक लचर कानून व्यवस्था इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है ,हां रिजर्व फॉरेस्ट के नाम पर उत्तराखंड में रहने वाले निवासियों को बैरियर लगाकर उनसे टैक्स वसूलने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही , उत्तराखंड जिसे देवताओं की धरती कहा जाता था ,उत्तराखंड में आने वाले तीर्थ यात्री जो कि यहां की नैसर्गिक सुंदरता देखने आते हैं, अब मदिरा के डिपार्टमेंटल स्टोर की सुंदरता देख सकेंगे, जिस प्रकार वर्तमान सरकार तीर्थ स्थलों में शराब के डिपार्टमेंटल स्टोर खोलती जा रही है अपराध को आप स्वयं आमंत्रित कर रहे हैं , सन् नब्बे के दशक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मुख्य मंत्री बंसीलाल द्वारा जब हरियाणा में शराबबंदी की गई थी तो वहां अपराधों में अप्रश्चित रूप से गिरावट आई थी, विगत वर्षों की हालत देखते हुए ऐसे लग रहा है जैसे उत्तराखंड इस सिद्धांत पर चल रहा है आओ खाओ जेब भरो और चले जाओ। यह आम जनमानस का सरकार के प्रति आक्रोश ही है जो मूल निवास के रूप में देखने को मिल रहा है।
- दीपक कंडारी।
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