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वरिष्ठ अधिवक्ता कमल विरमानी( अभियुक्त) की जमानत याचिका खारिज

रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा मामले में बंद वरिष्ठ नामी अधिवक्ता कमल वीरमानी की जमानत याचिका खारिज 
स्पष्ट एक्सप्रेस।
देहरादून, 28 सितंबर 2023 : रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा के मामले में 27 अगस्त से जेल में बंद वरिष्ठ नामी अधिवक्ता कमल वीरमानी की जमानत याचिका जिला जज देहरादून की कोर्ट में खारिज कर दी है  जिला जज  द्वारा अपने आदेश में की गई व्याख्या  से यह वर्णित होता है कि अपराध अपने आप में कितनी गंभीर श्रेणी का है । जो इस प्रकार है" यह इस प्रकृति का अपराध है कि जिससे लोगों की न्याय व्यवस्था पर से  आस्था हट जाती है,  क्योंकि वर्तमान अपराध के अंतर्गत जो  कूटरचित दस्तावेज बनाए गए हैं उनकी प्रामाणिक प्रतिलिपियों को न्यायालय भी भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत 30 वर्ष प्राचीन होने के आधार पर सामान्य रूप से साबित करने की अपेक्षा नहीं रखता है। इन परिस्थितियों में इस प्रकृति के अपराध से न्याय प्रशासन की  नींव पर प्रहार होता है और अभियुक्त इसी न्याय प्रशासन का एक हिस्सा होने के कारण से ऐसे अपराध में  संलिप्त होना   और भी गंभीर हो जाता है, इन परिस्थितियों में अभियुक्त द्वारा दिया गया जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है

जमानत याचिका पर 23 सितंबर को सुनवाई की गई थी। बचाव व अभियोजन पक्ष की करीब ढाई घंटे की बहस सुनने के बाद जिला जज प्रदीप पंत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। जमानत याचिका पर बचाव पक्ष कीओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा,  एवं  श्री एस0 के0 धर अधिवक्ता देहरादून ,जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता गुरु प्रसाद रतूड़ी ने  अभियुक्त की जमानत के विरोध करते हुए विवेचक के द्वारा लिखित  साक्ष्यों   के पर आधार पर ठोस तर्क रखे थे।

  अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता  गुरु प्रसाद रतूड़ी जमानत के विरोध में अपने तर्कों में बताया की यह मामला आम आमजन की संपत्ति के फर्जीवाड़े से जुड़ा है जिनकी न्याय और न्यायपालिका पर गहरी निष्ठा है,  इस प्रकरण में आरोपित कमल विरमानी  व कुंवर पाल सिंह मुख्य अभियुक्त बनाए गए हैं  अभियुक्त द्वारा अपनी 27 सालों के सिविल मामलों के अनुभव की जानकारी का गलत प्रयोग करते हुए फर्जी  अभिलेखों की ड्राफ्टिंग की है, एवं न्यायालय के परिसर में अभियुक्त के मौजूद चेंबर के कंप्यूटर से उसके विरुद्ध   कतिपय  साक्ष्य भी प्राप्त है, और यदि अभियुक्त को जमानत हुई तो वह अपने सामाजिक रुतबे  और प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर साक्ष्य एवं  साक्षियों  से छेड़छाड़ कर व डरा धमका कर  विवेचना में प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है,   एवं रजिस्ट्री  फर्जीवाड़े के  मामले में अभी पूछताछ जारी है 

 दूसरी तरफ अभियुक्त की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने  पैरवी करते हुए कहा था कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं है। उन्हें सह अभियुक्तों के बयान के आधार पर ही गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्त पिछले 27 वर्षों से बतौर अधिवक्ता का व्यवसाय करता है ,  इसके अलावा भी उन्होंने  अभियुक्त की ओर से जमानत  याचना करते हुए अभियुक्त कमल विरमानी के पक्ष में तमाम तर्क रखे थे। इसके अलावा जमानत पत्र के समर्थन में  अभियुक्त उसके चचेरे भाई परोपकार अतुल विरमानी द्वारा अपना शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को अभियुक्त की तरफ से इस न्यायालय में दिया गया प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र होना बताया और इसके अतिरिक्त अभियुक्त कोई अन्य जमानत प्रार्थना पत्र किसी अन्य न्यायालय में लंबित नहीं है  ।

  दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद  जिला जज प्रदीप पंत द्वारा  जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, बुधवार दिनांक 27 सितंबर 2023 को  जिला जज प्रदीप पंत ने न्यायालय में  अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा जमानत याचिका के लिए रखे तर्को  अभियोजन के द्वारा साक्ष्य के आधार पर रखें तर्कों  का मूल्यांकन  कर गुण दोष के आधार पर कर अभियुक्त  कमल विरमानी की जमानत  याचिका खारिज कर दी। 

















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