स्पष्ट एक्सप्रेस 25 अगस्त 2023
देहरादून: घटना के अनुसार दिनांक 6 फरवरी 2010 को श्री संजीव दीक्षित पुत्र श्री जगदीश दीक्षित प्रबंधक श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण आश्रम हर की पौड़ी हरिद्वार ने एक शिकायती प्रार्थना पत्र पुलिस अधीक्षक , सतर्कता सेक्टर देहरादून को इस आशय से दिया कि श्री महेंद्र कुमार भार्गव पुत्र स्वर्गीय श्री रमेश प्रसाद भार्गव निवासी 43 अंबेडकर नगर मोहल्ला कड़च , थाना ज्वालापुर हरिद्वार ,तत्कालीन ,आंकिक, विद्युत व्यापार केंद्र भोपत वाला, उत्तराखंड कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा शिकायतकर्ता के आश्रम के विद्युत बिलों की धनराशि को संशोधित कर काम करने के एवज में ₹ एक लाख रिश्वत की मांग की गई थी, शिकायतकर्ता यह रिश्वत नहीं देना चाहता था और भ्रष्ट कर्मचारी के खिलाफ कानून के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई चाहता था, शिकायतकर्ता की उपरोक्त शिकायत पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए सतर्कता अधिष्ठान, सेक्टर देहरादून की विजिलेंस ट्रैप टीम द्वारा दिनांक 8 फरवरी 2010 को अभियुक्त श्री महेंद्र कुमार भार्गव को शिकायतकर्ता से ₹ एक लाख रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर थाना सतर्कता अधिष्ठान, सेक्टर देहरादून में मुकदमा , धारा 7/13(1) डी सपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर विवेचना निरीक्षक श्री भान सिंह सुमेर द्वारा की गई , विवेचना की कार्यवाही पूर्ण कर नियमानुसार आरोप पत्र दिनांक 7 अप्रैल 2010 को माननीय विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम देहरादून में दाखिल किया गया, माननीय न्यायालय में सतर्कता अधिष्ठान के अभियोजन अधिकारी श्री अनुज कुमार साहनी एवं पैरोपकार आरक्षी गोपाल सिंह कुंवर धारा की गई कुशल पैरवी पर सुश्री अंजलि नौलियाल, माननीय विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम देहरादून द्वारा दिनांक 24 अगस्त 2023 को दिए गए निर्णय में धारा 7 के आरोप में 3 साल का सश्रम कारावास व पचास हजार ₹ का अर्थ दंड से दंडित किया गया अर्थ दंड अदा न करने पर दोषसिद्धि तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास तथा धारा 13(1) डी सपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास व पचास हजार ₹ का अर्थ दंड से दंडित किया गया, अर्थ दंड अदा न करने पर दोषसिद्धि एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास से दंडित किया गया ।
पैरोपकार श्री गोपाल सिंह द्वारा बताया गया कि, लोक तंत्र में भ्रष्टाचार ही अपराध की सबसे बड़ी जड़ है, भ्रष्टाचार से ही अपराध पनपता और पोषित होता है, यदि कोई उत्तराखंड राज्य सरकार के अधीन कार्यरत लोक सेवक के द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है तो बिना किसी भय के शिकायत हेल्पलाइन नंबर -1064 पर करें।
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