
स्पष्ट एक्सप्रेस 07 अप्रैल 2023
" करेला ऊपर से नीम चढ़ा, "आसमान से गिरा खजुर पे अटका " जी हां, हम बात कर रहे है 'श्यामपुर-खदरी रेलवे फाटक की '
यदि आपको वर्षो पुरनी कहवातें अपनी आँखों से चित्रार्थ होते देखनी है, तो NH-58(34), श्यामपुर-खदरी रेलवे फाटक पर आकर देख सकते हैं |
उत्तराखंड के समस्त गढ़वाल क्षेत्र को दिल्ली से जोड़ने वाली लाइफ लाइन NH 58 (34) पर ऋषिकेश-हरिद्वार, रेलवे फाटक व बंगाला नाले की संकरी पुलिया होने से आम आदमी के लिए इस तरह हो गई है मानों "आसमान से गिरे खजुर पर अटका "।
उक्त स्थान पर पिछले दो दशक से इतना ज्यादा ट्रैफिक बढ़ गया है ,जब भी कोई ट्रेन आती है तो एक बार रेलवे फाटक बंद होने के उपरांत वाहनों की लंबी कतार श्यामपुर बाईपास से लेकर नेपालीफार्म तक लग जाती हैं। पुलिस प्रशासन को मजबूरन ऋषिकेश की और जाने वाले वाहनों को भानियावाला वाले रूट पर डाइवर्ट करना पड़ता है।
दो दशकों में सरकारे तो बदली पर इस जगह का स्वरूप नहीं बदला।
मौजूदा सरकार कई बार (फ्लाईओवर का प्रस्ताव भेज दिया है, टीम ने सर्वे कर लिया है, हाईवे का प्रस्ताव पास हो चुका है ) जैसी मुगली घुट्टी स्थानीय लोगों को कई बार पिला चुकी है। लेकिन नतीजा सिफर रहा है।
इन दो दशकों से गर्मियों, चार धाम यात्रा व टूरिस्ट सीजन में तो यहाँ पर तीन-तीन थानों के पुलिसकर्मीयो को दिन भर ट्रैफिक खुलवाने के लिए जूझते हुए देखा जा सकता है। कई बार रायवाला, छिद्दरवाला, खैरी खुर्द, गढ़ी मयचक, खदरी, श्यामपुर, गुमानीवाला आदि आसपास के स्कूल आने जाने वाले बच्चों का पूरा दिन अपने स्कूल बस में हाइवे पर ही बीत जाता है, और बच्चों के खेल कूदने का समय इस ट्रैफिक जाम की भेट चढ़ जाता है। अभिभावक भी अपने बच्चों के इंतजार में सड़क के किनारे इंतजार में चिंता से बेहाल हो जाते हैं और बेबस होकर ट्रैफिक खुलने के लिए कोई चमत्कार होने के लिए हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं।

बीते साल हरिद्वार, रूड़की, मंगलोर, लक्सर व यूपी आदि स्थानों से एंबुलेंस द्वारा एम्स ऋषिकेश आने वाले गंभीर रोगियों की सांसे कई बार इस भयंकर जाम में थमती देखी गई हैं |
पिछले एक दशक से आम आदमी की परेशानी से यहां की सरकार को कोई वास्ता नहीं है। शायद इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को यह समस्या कभी दिखाई ही नहीं पड़ी, तभी तो किसी भी जनप्रतिनिधि ने आज तक इस जगह की जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए आवाज नहीं उठाई। जगह जगह धरने प्रदर्शन देखे पर इस नासूर फाटक से लगने वाले जाम के विरुद्ध कोई आवाज नहीं सुनाई दी। शायद इस क्षेत्र के लोकसभा और विधान सभा में चुने गये प्रत्याशी ने ऐसे गम्भीर विषय को २०२४ तक के लिये ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
ऐसा जान पड़ता है , उत्तराखण्ड के विकास का डबल इंजन इस रेलवे फाटक एवं इस संकरी पुलिया के बीच आकर फंसा हुआ है, जो आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
एक तरफ यदि हम सिस्टम की बात करें तो यहां पर यह कहावत कि " करेला ऊपर से नीम चढ़ा " और आम आदमी की बात करें तो "आसमान से गिरा खजूर पर अटका " वाली कहावतें श्यामपुर-खदरी रेलवे फाटक पर सटीक बैठती हैं।
0 Comments